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हनुमान मंत्र साधना विधि और नियम
डॉ श्रद्धा सोनी, वैदिक ज्योतिषाचार्य, रतन विशेषज्ञ

कलियुग में हनुमान जी एक ऐसे देव है जो अपनें समस्त भक्तों की हर मनोकामना को अतिशीघ्र पूर्ण करते है, वैसे तो श्री राम भक्त हनुमान भगवान श्री राम के नाम लेने मात्र से ही प्रसन्न हो जाते है लेकिन यदि आप चाहते है किसी बड़ी मनोकामना को पूरा करना या फिर किसी बड़े संकट से छुटकारा पाना तो ऐसे में हनुमान जी के प्रिय मंत्र द्वारा उनकी साधना करना सबसे अच्छा होता है. हनुमान जी की साधना में साधक के भाव के ऊपर निर्भर करता है कि वह किस प्रकार से स्वयं को हनुमान जी के प्रति समर्पित करता है.
■ यदि आप नियमपूर्वक साधना समय से पूरा करते है तो आपकी मनोकामना अवश्य ही पूर्ण होती है , यदि आप मंत्र साधना में सिद्धि अर्जित करने के उद्देश्य से साधना करते है तो उसे पूर्णरूप से स्वयं को हनुमान जी के प्रति समर्पित करना होगा |
● यदि आप द्रढ़ संकल्प के साथ पूर्ण विधि और नियमों का पालन करते हुए साधना करते है तो साधना में सिद्धि अवश्य ही प्राप्त होती है |
हनुमान साधना मंत्र :–
ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्
अथवा
ॐ मनोजवं मारुततुल्य वेगम् जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं ।
वातात्मजं वानर युथमुख्यं श्री रामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥
आज हमने आपको हनुमान जी के दो मंत्रो के विषय में जानकारी दी है इनमें से किसी भी एक मंत्र द्वारा आप अपनी साधना पूर्ण कर सकते है साधना की विधि और नियम इस प्रकार से है,
हनुमानजी की साधना विधि
अपने घर में एक ऐसे कक्ष को चुने जिसमें आपको कोई भी तंग न करें, अब इस कक्ष की अच्छे से साफ-सफाई करें, गोमूत्र – गोमय से अपने बैठने की जगह बना ले और गंगाजल मिलाकर पूरे कमरे में छिड़ककर कमरे को पवित्र कर ले. अब कक्ष में पूर्व दिशा की और एक चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर उस पर गणेश स्थापन करें.
उसके बायीं ओर दूसरी एक चौकी पर केसरियां रंग का कपड़ा बिछाकर उस चौकी पर हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करने से पहले हनुमानजी के पीठ एवं यंत्र की स्थापना करें । उसके बाद, उस चौकी की बायीं तरफ (ईशान कोण) में एक मिट्टी के कलश में पानी भर कर उसमें पंच रत्न, पंच धातु, सप्त मृत्तिका, सर्वोषधि, दक्षिणा डालकर पुण्याहवाचन कलश की स्थापना करें.
एक पानी वाला नारियल इसके ऊपर लाल कपड़ा लपेटकर इसे पानी के कलश के ऊपर रख दे, इसके स्वयं भी केसरियां रंग के वस्त्र धारण कर चौकी के सामने लाल आसन बिछाकर बैठ जाए |
अब गुग्गुल का (गुगल) धुप करें और शुद्ध घी का दीपक भगवान की दाहिनी ओर तथा सरसों के तेल का दीपक भगवान की बायीं ओर प्रज्वल्लित करें.
■ अब दायें हाथ में थोड़ा जल लेकर इस प्रकार संकल्प करें :-
हे परमपिता परमेश्वर मैं (अपना गोत्र बोले), फिर नाम (अपना पुरा नाम बोले) आपकी कृपा से हनुमान जी का यह मंत्र सिद्ध कर रहा हूँ इसमें मुझे सफलता प्रदान करें ॥
यह कहकर हाथ के जल को नीचे जमीन पर छोड़ दे |
अब हाथ से तीन बार जमीन को स्पर्श करते हुए तीन बार बोले :– ॐ भूम्यै नमः ॥
अब आप दायें हाथ में गोमुखी (एक विशेष प्रकार की कपडे की थेली) में रुद्राक्ष की माला लेकर पहले एक माला अपने गुरु मंत्र की करें|
इसके बाद एक माला गणेश जी के इस मन्त्र की करें :- ॐ गं गणपतये नमः ||
यह करने के उपरांत आप भगवान श्री राम का स्मरण करें और अब उपरोक्त हनुमान जी के दो मन्त्रों में से किसी भी एक मंत्र द्वारा मंत्र जाप आरंभ कर दे आरंभ के कुछ दिन आप मन्त्र जाप बोल कर करें, बाद में मन ही मानसिक मंत्र का उच्चारण करें आप अपने सामर्थ्य के अनुसार रोज़ की मंत्र जाप संख्या निर्धारित करें |
इस प्रकार यह मंत्र जाप आप लगातार 41 दिनों तक करें, 41 दिन पूर्ण होने पर जितना जाप किया हे उसके दस प्रतिशत (दशांश) आहुतियाँ (पायस, सफेद तिल, खारेक (खरबूजा), कोपरा, गाय का घी) इन सब को मिलाकर हनुमान जी के मंत्र की आहुति दे, पूरे 41 दिन तक हनुमान जी की चौकी की स्थापना ऐसे ही रहने दे | साधना पूर्ण होने पर नारियल,सिन्दूर को कुछ दक्षिणा के साथ किसी भी हनुमान जी के मंदिर में चढ़ा आये |
साधनकाल के समय प्रत्येक मंगलवार हनुमान जी को जहाँ चौला चढ़ाया जाता हो वंहा जाकर चौला अर्पित करें और मंगलवार के दिन जब भी समय मिले सुंदरकांड, हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमान अष्टक, बजरंग बाण, मारुति माला मंत्र, हनुमान वडवानल स्तोत्रम् इन में से किसी एक का या सारे पाठ अवश्य करें, एक डिब्बी में हनुमान जी के चरणों से सिन्दूर लाकर रख ले प्रतिदिन साधना शुरू करने से पहले उस सिन्दूर से स्वयं को तिलक करें |
हनुमान साधना के नियम
1 साधना में मंत्र जप की संख्या, आसन एवं समय एक समान रखे और प्रतिदिन इस का पालन करें ।
2 मन में द्रढ़ संकल्प और हनुमान जी के प्रति आपका समर्पण भाव सच्चा होना चाहिए |
3 पूर्णरूप से साधना काल के समय ब्रह्मचर्य का पालन करें, परस्त्री या किसी भी लड़की को हवस की नजर से देखना या उसके साथ बातचीत भी करना आपकी साधना को भंग कर सकता है, हर स्त्री या लड़की में माँ और बहन की नजर से देखने का भाव होना चाहिए |
4 यदि आप विवाहित है तो साधना काल के समय अपनी पत्नी से भी संबंध न बनाये, भूमि के उपर सिर्फ काले रंग का कंबल बिछाकर शयन करें, किसी ओर की शैया (पथारी) पर न बैठे ना सोए |
5 साधना काल के दौरान एक ही समय (या तो सुबह या तो रात को) बिना प्याज़ – लहसुन वाला सात्विक भोजन ही ग्रहण करें, अपने ही घर का भोजन ग्रहण करें, भोजन करते समय मौनव्रत धारण करें हो सकें तो अपने हाथों से ही अपना भोजन खुद ही बनाकर खाएं ।
6 साधना काल के दौरान साफ़ सफ़ाई का ख्याल रखें मतलब सुबह शाम दो समय हो सके तो ठंडे पानी से या फिर गर्म पानी से स्नान करें, सर के बाल, दाढ़ी, बगल आदि जगहों के बाल एवं नाखून नही कटवा सकते |
7 व्यर्थ में दूसरों के स्पर्श से बचना चाहिए इसलिए कंही भी बाहर आए जाए नही ।
8 साधना करते समय केसरियां रंग के वस्त्र या लाल रंग के वस्त्र धारण करके ही मन्त्र जप करने चाहिए |
इस प्रकार विधि-विधान के अनुसार हनुमान जी की साधना को पूर्ण करते है तो आपकी हर मनोकामना पूर्ण होती है. हर संकट दूर होते है और मंत्र की सिद्धि प्राप्त होती है, हनुमानजी की साधना में यदि आप अपने गले में सिद्ध हनुमान यंत्र का तावीज धारण करके साधना करते है तो इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है. इसलिए पहले गले में सिद्ध हनुमान यन्त्र तावीज धारण करें और फिर हनुमान की साधना का आरंभ करें ।


